उत्तर प्रदेशवाराणसी

ठंड की शुरूआत में ऊनी कपड़ों से सजी पटरी की दुकानें

बाहर से माल लाकर कुछ कमीशन तो कुछ खुद का करते हैं व्यापार

 Woolen rafters in the beginning of winter in varanasi

वाराणसी। ठंड के शुरूआती दौर में ही पटरियों पर ऊनी कपड़ों (स्वेटर और जैकेट) की दुकानें लगने लगीं हैं। शहर के कचहरी इलाके में पटरियों पर यह दुकानें लगाई गई हैं। इनमें कुछ बाहर और कुछ शहर के ही रहने वाले लोगों ने दुकान लगाई है, जो दिल्ली से माल लाकर यहां बेजने का काम करते हैं।

ठंड की शुरूआत हो चुकी है और कोरोना काल में मंदी की मार झेल रहे लोगों का जीवन धीरे-धीरे पटरी पर लौट रहा है। इसमें कई परिवार ऐसे हैं जो अभी भी जीविकोपार्जन के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनमें से सीजनी व्यापार करने वाले लोग भी हैं जो बदलते मौसम के साथ अपने व्यापार में बदलाव करते रहते हैं। इनमें पटरी पर दुकान लगाने वाले लोगों की जमात भी है जो सीजन के अनुसार अपने व्यापार को बदलते रहते हैं। बदलते मौसम में पटरियों पर ऊनी कपड़ों की दुकानें (स्वेटर और जैकेट) लगनी शुरू हो गई है।

नदेसर स्थित राजा बाजार के रहने वाले मोहम्मद गुड्डू ने बताया कि हम पहले अपने रुपयों से व्यापार करते थे लेकिन कोरोना की वजह से इस सीजन में रुपयों की किल्लत के कारण दूसरे का माल कमीशन पर लेकर बेज रहे हैं। हमने कल से दुकान लगाना शुरू किया है। दिन भर में जो भी बिक्री होती है उसमें कमीशन बनता है।

मंडुआडीह के सूरज ने बताया कि आज से दुकान लगाई है। हम दिल्ली से माल लाकर यहां बेचते हैं। दाम पूछने पर बताया कि प्लोवर 50 से 150 और जैकेट 200 से 300 में बेजते हैं। हमारी दुकान पर हर वर्ग के ग्राहक आते हैं।

मंडुआडीह के ही महेंद्र ने बताया कि कोरोना की वजह से हमारे रखे हुए पैसे भी खर्च हो गए। व्यापार के लिए कुछ नहीं बचा तो कमीशन पर माल लेकर बेच रहा हूं। जब से होश संभाला है तब से सीजनी व्यापार ही करते आया हूं। इसी से परिवार का पेट पालता हूं।

प्रयागराज के नैनी से आये आकाश कुमार गोस्वामी और मंजीत गोस्वामी ने बताया कि वो हर साल यहां दुकान लगाते हैं ठंड की शुरूआत में ही दिल्ली से माल खरीदकर बनारस बेचने आते हैं। जैकेट 150 से 400 तक के हैं, जैसा ग्राहक मिल जाए वैसे ही भाव तय करके बेच देते हैं।

Show More

Related Articles

Back to top button