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क्यों मनाया जाता है धनतेरस का त्योहार, आइये जानें…

Why is the festival of Dhanteras celebrated, let's learn ...

दिल्ली। पूरे देश में कार्तिक मास कृ्ष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस पर्व के रूप में मनाया जाता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, तिथियों के घटने और बढ़ने के कारण इस साल धनतेरस 12 और 13 नवंबर दोनों दिन मनाया जा रहा है। इस दिन धन्वंतरि के अलावा, देवी मां लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर की भी पूजा की जाती है। धनतेरस के दिन दक्षिण दिशा में दीपक जलाने की परंपरा भी है।

धनतेरस की खरीदारी आज रात से शुरू हो जाएगी, क्योंकि आज रात में त्रयोदशी तिथि लग जाएगी. इस दिन चांदी के सिक्के, आभूषण आदि की खरीदारी करना शुभ होता है. लक्ष्मी पूजा के दिन चांदी के इन वस्तुओं की पूजा करना चाहिए। धनतेरस के दिन झाड़ू जरूर खरीदें. झाड़ू को माता लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है. इससे दरिद्रता का नाश होता है. मान्यता है कि धनतेरस के दिन झाड़ू खरीदने पर घर में सकारात्मकता का संचार ​होता है।

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बता दें, समुद्र मंथन की भूमिका में मंदराचल पर्वत को मथानी और नागों के राजा वासुकी को मथानी के लिए रस्सी बनाया गया। वासुकी के मुख की ओर दैत्य और पूंछ की ओर देवताओं को किया गया और समुद्र मंथन आरम्भ हुआ। समुद्रमंथन से चौदह प्रमुख रत्नों की उत्पत्ति हुई जिनमें चौदहवें रत्न के रूप में स्वयं भगवान धन्वन्तरि प्रकट हुए जो अपने हाथों में अमृतकलश लिए हुए थे। भगवान विष्णु ने इन्हें देवताओं का वैद्य और वनस्पतियों तथा औषधियों का स्वामी नियुक्त किया। इन्हीं के वरदान स्वरूप सभी वृक्षों-वनस्पतियों में रोगनाशक शक्ति का प्रादुर्भाव हुआ।

 

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