उत्तर प्रदेशवाराणसी

वाराणसी में दिखी छठ की छठा, घाटों पर व्रती महिलाओं ने दिया अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ

वाराणसी। छठ महाव्रत के प्रसाद से संतान सुख, परिवार की समृद्धि की प्राप्ति के लिए हजारों व्रतियों के हाथ आज बनारस के गंगा तट सहित कुण्ड और तालावों पर अस्ताचलगामी सूर्य को अघ्र्य देने को उठें। सूर्यषष्ठी तिथि पर दोपहर बाद से गंगा घाट से लेकर कुण्ड व सरोवर पर अटूट और अटल आस्था का सैलाब उमडा। ऐसा ही दृश्य एक बार फिर कल की सुबह नजर आएगा, जब उदयाचलगामी सूर्य को अघ्र्य अर्पित करने के साथ ही लोक आस्था के महापर्व की पूर्णाहुति हो जाएगी।

The sixth of Chhath seen in Varanasi, the women who fasted on the Ghats offered Archa to the Asthachalagami Sun

दूसरा नियम, खरना पूरा होते ही व्रती महिलाओं का कठिन व्रत शुरू हो गया। पंचमी तिथि पर व्रतियों ने दिन भर उपवास रखने के बाद शाम को घाट और कुण्ड के किनारे बनी वेदी पर दीया-बाती की। इस दौरान छठी माई होउ न सहाय.. और हे छठी मइया सुन लीं अरजिया हमार.. जैसे गीत श्रद्धालु गुनगुनाते रहे। पूजा के बाद वापस घर लौट कर नहाय-खाय के दिन  देवकरी  वाले स्थान पर पूजा-अर्चना की। इसके बाद गन्ने के रस या गुड़ की बने खीर या बखीर छठी मइया को चढ़ाया गया। तत्पश्चात उसे प्रसाद स्वरूप व्रतियों ने खुद ग्रहण किया और परिवार के अन्य सदस्यों में भी बांटा। ‘खरना’ प्रसाद के लिए आसपास के लोगों को बुलाया भी गया। इस दौरान ‘ देवकरी’  और उसके आस-पास स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा गया। इसके साथ ही व्रती महिलाओं का 36 घंटे का निर्जल व निराहार व्रत शुरू हो गया। अब कल उगते सूर्य को अर्घ देने के बाद ही व्रत का पारण होगा।

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