उत्तर प्रदेशबाराबंकी

धान खरीद में लापरवाही की वजह से धान खरीद केंद्रों पर पसरा सन्नाटा

बाराबंकी। उत्तर प्रदेश सरकार ने धान खरीद में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ बड़े ही कड़ी कार्रवाई की हो लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है जिला स्तर पर विपणन विभाग के खरीद केंद्र के अलावा धान खरीद में लगी अन्य एजेंसियों के दर्ज़नों धान खरीद केंद्र अभी भी खुल नहीं सके हैं। कहीं पर धान खरीद केंद्र एजेंसियों के पास धन का भाव है तो कहीं उनको अभी तक कोड नहीं मिल पाए हैं और कहीं अभी तक उनको किसान का धान रखने के लिए बोरे नहीं मिल पाए है धान खरीद केंद्र के प्रभारी बता रहे हैं।

बाराबंकी में जब हमारी टीम ने जल इनक्रीस केंद्रों का रियलिटी चेक किया तो हमने जाना कि यहां विपणन शाखा के धान खरीद केंद्र ही संचालित हैं, लेकिन जो अन्य एजेंसियां जिनको धान खरीद में शामिल किया गया है इन इनके धान खरीद केंद्र अब भी बंद पड़े हैं ऐसा ही एक सेंटर हरख ब्लॉक के जैनाबाद में भी है जहां पर सिर्फ धान को छानने वाली मशीन और कांटा एक चारदीवारी के बीच में पड़ा हुआ है। यहां खरीद केंद्र के नाम पर एक बैनर लगा है और साथ ही यहां एक क्रय केंद्र प्रभारी भी है लेकिन यहां धान का एक भी दाना नहीं है और ना ही एक भी किसान यहां पर अपनी ट्रैक्टर ट्रॉली लेकर आया हुआ है वजह यह है कि क्रय केंद्र प्रभारी की माने तो अभी तक उनको कोड एलाट नहीं हुआ है जिसकी वजह से वह किसानों का धान नही खरीदा जा रहा हैं।Lजबकि देखने वालत यह है कि लगभग 10 दिन पहले ही खरीद शुरू हो गई थी और 10 दिन के बाद भी अभी जैनाबाद के धान खरीद केंद्र में।

धान खरीद शुरू नहीं हुई है जिसकी वजह से क्षेत्रीय स्तर पर जिसके लिए क्षेत्रीय स्तर पर जो किसान है वह दर-दर भटक रहे हैं या तो उन्हें कई किलोमीटर दूर मंडी अपना धान लेकर जाना पड़ता है और या फिर उन्हें व्यापारियों के बारे में उस स्थान को औने पौने दाम पर सताधर बेचना पड़ता है क्योंकि और उनके पास कोई भी चारा नहीं है। हम किसान नेताओं की माने तो। कई जगह से एजेंसियों पर बिचौलियों का धान खरीदा जा रहा है। जबकि जो किसान हैं उनको टोकन के नाम पर एक लंबी डेट दे दी जाती है।

किसानों की सबसे बड़ी समस्या यह भी है कि उन्हें दूसरी खेती भी करनी है, लेकिन उनके पास पैसा नहीं है। और सरकारी एजेंसियां धान खरीद में लगी है उनका पैसा उन्हें उन्हें अपने किसानों के धान का पैसा कुछ दिनों बाद ही मिलता है जबकि किसान को तुरंत पैसे की जरूरत है जिससे कि वह अगली खेती कर सकें। कई किसानों ने यह भी बताया कि शायद यही वजह है कि नगद पैसे के चक्कर में। नगद पैसे के चक्कर में किसान पबगहव्यापारियों बिचौलियों के हाथों सस्ते दामों पर धान भेज देते हैं।

जिला प्रशासन द्वारा यह कहा जाता है कि धान खरीद में किसी तरह की अधिकारियों की लापरवाही बर्दाश्त नही की जाएगी पूरीपारदर्शिता लाई जाएगी लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बताती है जब तक धान खरीद में सुस्ती दिखाने वाली एजेंसी के ऊपर सख्ती से कार्रवाई नहीं की जाएगी। तब तक धान खरीद पाना तो लक्ष्य पूरा हो पाएगा और ना ही किसानों को उनका वाजिब दाम मिल पाएगा।

Show More

Related Articles

Back to top button