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Monday, July 6
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कोरोना को दूर करने व विश्व शान्ति के लिए किया गया नवचण्डी यज्ञ

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वाराणसी। सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के वेद विभाग के स्मार्थ यज्ञ मण्डप में कुलपति प्रो. राजाराम शुक्ल की अध्यक्षता में वर्तमान में सम्पूर्ण विश्व में चारों तरफ फैले वैश्वीक महामारी को रोकने एवं राष्ट्र मे सुख शान्ति के लिये, विश्व कल्याण के लिए वेद विभाग के तत्वावधान में आज प्रात 7:30 बजे (दुर्गाशप्तसती पाठ) नवचंडी यज्ञ एवं हवन किया गया।

इस महा यज्ञ के मुख्य अतिथि जिलाधिकारी कौशलराज शर्मा ने कहा कि विश्वकल्याण, कोरोना महामारी को दूर करने एवं विश्व शान्ति के लिये इस विश्वविद्यालय के द्वारा नवचंडी महायज्ञ किया गया है। इससे निश्चित ही विश्वशान्ति प्राप्त होगी। यह परम्परागत शिक्षा का अतिप्राचीन स्थल है यहाँ पर परम्परा के अनुसार ही आचार्यों के द्वारा नव कुंडों पर यह यज्ञ सम्पादित किया गया। आज यहां पर नवचण्डी यज्ञ का अनुष्ठान किया गया इससे सम्पूर्ण लोग लाभान्वित होंगे। जिलाधिकारी शर्मा ने कहा कि कोरोना महामारी से मानवता प्रभावित हुई है, सबकी अलग-अलग महामारी दूर करने की प्रक्रियाएं हैं। वेदों में उक्त या वर्णित के आधार पर वैज्ञानिक ढंग से समिधा से, आहुतियों से सकारात्मक ऊर्जा विकसित किए जा रहे हैं, जो कि पूर्णरूप से वैज्ञानिक एवम् अनुकरणीय है। इस यज्ञ से वाराणसी की जनता ही नहीं, अपितु सम्पूर्ण देश और विश्व भी लाभान्वित होगा। इसके लिए सम्पूर्ण विश्वविद्यालय प्रशासन बधाई का पात्र है।

यज्ञ की अध्यक्षता करते हुये विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो राजाराम शुक्ल ने कहा कि यज्ञ के लिये अरणी मंथन के द्वारा अग्नि को प्रकट किया गया, प्राचीनभारतीय संस्कृति में दिनचर्या का शुभारंभ हवन, यज्ञ, अग्निहोत्र आदि से होता था, तपस्वी और ऋषिमुनि, सद्गृहास्थों, बटुक ब्रह्मचारी नित्य प्रति यज्ञ करते थे इससे महामारी एवं अन्य रोगों को दूर किया जाता है।इससे विषाणु एवं संक्रमण नष्ट होंगे। कुलपति प्रो. शुक्ल ने कहा कि आज वर्तमान परिस्थिति में कोरोना महामारी को दूर करने तथा विश्व शान्ति को बनाने के लिये दुर्गाशप्तसती (नवचंडी) पाठ एवं हवन, चंडी यज्ञ वेद भवन के यज्ञशाला के नव कुंडों में किया गया। जिसमें प्रत्येक कुण्ड के फल के अनुसार क्रमश: चतुरस्त्रकुण्ड-मनोकामना पूर्ण हेतु, योनि कुण्ड-सृष्टि हेतु, अर्धचन्द्र कुण्ड-मंगल कार्य पूर्ति, त्रिकोड़ कुण्ड-शत्रु नाश के लिये, वृत्तकुण्ड-आर्थिक वृद्धि एवं विश्वशान्ति हेतु, पद्म कुण्ड-सुखद वृष्टि के लिये, षटकोण कुण्ड-मृत्यु भय दूर करने, अष्टात्र कुण्ड-अरोज्ञता एवं लक्ष्मी प्राप्ति, आचार्य कुण्ड-ज्ञान प्राप्ति के लिये यह हवन यज्ञ किया गया।

यज्ञ के प्रारम्भ में विभागीय आचार्यों एवं शोध विद्यार्थियों के द्वारा व्यक्ति की दूरी बनाकर दुर्गा शप्तसती पाठ किया गया जिसमे यजमान के रुप में कुलपति प्रो राजाराम द्वारा विधि पूर्वक पूजा और हवन यज्ञ करने के पूर्व सर्वप्रथम पंचांग पूजन, वास्तु मण्डल पूजन, योगिनी मण्डल पूजन, क्षेत्रफल पूजन तथा भगवती पूजन किया गया।प्रधान कुण्ड मे कुलपति प्रो शुक्ल के द्वारा आहुति दी गई। हवन समाप्ति के पाश्चात प्रदूषण दूर करने के लिये मुख्य अतिथि जिलाधिकारी कौशलराज शर्मा एवं कुलपति प्रो शुक्ल के द्वारा यज्ञशाला के बगल में आंवले का वृक्षारोपण किया गया।

उस दौरान यज्ञ हवन का शुभारंभ एवं स्वागत डॉ सत्येंद्र कुमार यादव, संचालन डॉ विजय कुमार शर्मा, धन्यवाद ज्ञापन वेद विभागाध्यक्ष प्रो महेंद्र नाथ पांडेय ने किया। वहीं प्रति कुलपति प्रो. हेतराम कछवाहा,प्रो अमित शुक्ल, प्रो. ब्रज भूषण ओझा, डॉ. मधुसूदन मिश्र, डॉ. राजा पाठक, डॉ. ज्ञानेन्द्र सापकोटा आदि लोग उपस्थित थे।

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