उत्तर प्रदेशवाराणसी

पूजे गए भगवान चित्रगुप्त, कायस्थों ने की कलम दवात की पूजा

 Kayasthas worship pen Dawat in varanasi

वाराणसी। भाई दूज का दिन जहां भाइयों और बहनों के लिए खास होता हैं। वहीं, कायस्थ समाज के लोगों के लिए भी विशेष महत्व वाला होता है। भगवान चित्रगुप्त के समक्ष कलम-दवात रखकर उनकी भी पूजा की गई। कायस्थ समाज के सदस्यों ने यम द्वितीया के मौके पर अपने प्रेरणास्नेत भगवान चित्रगुप्त का पूजन किया।

 Kayasthas worship pen Dawat in varanasi news

भगवान शिव की नगरी में चित्रगुप्त की पूजा की गई पहाड़िया स्थित मंदिर के साथ विभिन्न स्थानों पर कायस्थ जाति के लोगों ने भगवान की पूजा किया इस अवसर पर हुई गोष्ठी में वक्ताओं ने भगवान चित्रगुप्त के कृतित्व पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि भविष्य पुराण में चित्रगुप्त की जन्म कथा का वर्णन विस्तारपूर्वक किया गया है। ब्रम्हा की दश हजार वर्ष की तपस्या के बाद उनकी काया से भगवान चित्रगुप्त का जन्म हुआ था। मान्यता के अनुसार, उनके द्वारा किए गए लेखा-जोखा के बाद ही प्राणी को नया जन्म प्राप्त होता है। इस कारण कायस्थ समाज में यम द्वितीया के दिन कलम और दवात के पूजन का चलन शुरू हुआ। कायस्थ समाज के विभिन्न संगठनों की ओर से भगवान चित्रगुप्त का पूजन विधि विधान से किया गया। विभिन्न संस्थाओं की ओर से भी चित्रगुप्त पूजनोत्सव मनाया गया। पहाड़िया स्थित भगवान चित्रगुप्त के मंदिर में सुबह से ही कायस्थ समाज के लोग दर्शन पूजन कर भगवान का आशीर्वाद ले रहे हैं। वहीं, यहां पर पूरे विधि-विधान से भगवान चित्रगुप्त का पूजा किया जाता है। यहां पर कलम दवात की भी पूजा किया गया।

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अवधेश श्रीवास्तव ने बताया भगवान ब्रह्मा के 10,000 वर्ष कड़ी तपस्या के बाद उनके शरीर से एक मानव की उत्पत्ति हुई ब्रह्मा ने पूछा कौन है तो उन्होंने बताया, मैं आपके शरीर से उत्पन्न हुआ हूं उनके हाथों में कलम दवाद थी वर्मा जी ने उन्हें आशीर्वाद दिया कि आप कायस्थ समाज के लोगों का आशीर्वाद देंगे और उनका भाग्य उज्जवल करेंगे आज दिन कायस्थ जाती के लोग भगवान चित्रगुप्त का पूजा करते हैं जिसमें मान्यता कलम दवात की पूजा करने से उनके यश,लाभ,कृति की प्राप्ति होती है।

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