उत्तर प्रदेशवाराणसी

इन्द्रेश कुमार ने पातालपुरी मठ में हनुमान चालीसा का 108 बार किया हवनात्मक यज्ञ

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वाराणसी। प्राचीन काल से वैदिक अध्ययन का केन्द्र मठ ही रहे, जहां वेदपाठी सस्वर सुबह-शाम वैदिक मंत्रों का उच्चारण, हवन कर पर्यावरण और दूषित मानसिक प्रवृत्ति का शुद्धिकरण करते हैं। मुस्लिम आक्रान्ताओं ने सनातन संस्कृति को खत्म करने के लिये मठों पर हमले किये, पवित्र धार्मिक पुस्तकों को जला दिया ताकि भारत का ज्ञान और संस्कृति नष्ट हो जाये, लेकिन मठों के मठाधीशों धर्माचार्यों ने प्रत्येक वेद पाठियों को ही वेद याद कराकर उनके मस्तिष्क को ही वेद बना दिया। तब जाकर मुस्लिम आक्रान्ताओं से वेद की रक्षा हुई।

Indresh Kumar performed Hanuman Chalisa 108 times in the Patalpuri Math in varanasi

काशी के प्राचीनतम् पातालपुरी मठ में श्री हनुमान चालीसा हवनात्मक यज्ञ के बहाने जुटे काशी के विद्वानों, धर्माचार्यो, पीठाधीश्वरों ने वैदिक शिक्षा और मठों के संरक्षण को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेश कुमार के साथ गहन मंत्रणा की। इन्द्रेश कुमार ने पातालपुरी मठ में 108 बार हनुमान चालीसा का हवनात्मक यज्ञ किया। पिछले दिनों इन्द्रेश कुमार की प्रेरणा से पातालपुरी मठ के पीठाधीश्वर महंत बालक दास एवं विशाल भारत संस्थान के अध्यक्ष डा० राजीव श्रीवास्तव ने सभी धर्म और जातियों के लोगों के लिये न सिर्फ मठ के दरवाजे खुलवाये बल्कि 11 दिवसीय यज्ञ में जाति, धर्म, रंग, लिंग के भेद को बात करते हुये सभी लोगों को यज्ञ में भाग लेने का अवसर देकर भेदभाव को खत्म करने की क्रांतिकारी शुरुआत की।

Indresh Kumar performed Hanuman Chalisa 108 times in the Patalpuri Math in varanasi

बता दे, काशी के धर्माचार्यों ने पहली बार इस बात पर मंत्रणा की कि प्रतिदिन वैदिक अध्ययन कराने वाले मठों को चिन्हित कर उनको सरकारी संरक्षण दिया जाये और मठों को वैदिक शिक्षा के मामले में गुरूकुल का दर्जा देते हुए पीठाधीश्वरों को प्रोफेसर के बराबर वेतन दिया जाये। काशी के प्रत्येक मठ में सैकड़ों वेदपाठी ब्राह्मण रहते हैं जिनका खर्च मठ ही उठाते है। वेदों के ज्ञान की वजह से ही भारत दुनिया का विश्वगुरू रहा है, लेकिन वैदिक शिक्षा को हासिये पर डाल देने और सरकारी संरक्षण न मिलने की वजह से वैदिक शिक्षा में गिरावट आयी, जिसकी वजह से नैतिकता, मानवता, सद्भावना शांति, समरसता और पारिवारिक संगठित संरचना का क्षरण हुआ।

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