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हनुमान जयंती : संकट तें हनुमान छुड़ावै, मन क्रम बचन ध्यान जो लावै

दिल्ली। हनुमान जयंती (Hanuman Jayanti) खासतौर से उत्तर भारतीय हिंदुओं का एक पर्व है। मान्‍यता है कि चैत्र शुक्‍ल पूर्णिमा के दिन भगवान हनुमान ने जन्‍म (Birth of Lord Hanuman) लिया था। श्री हनुमान को शिव का अवतार माना जाता है। कहते हैं कि भगवान हनुमान भक्‍तों को हर बुरी बला और भय से बचाते हैं। मान्‍यता है कि हनुमान जयंती के दिन अगर तन-मन-धन से श्री हनुमान की पूजा अर्चना की जाए तो वह बेहद प्रसन्‍न होते हैं। वैसे तो हनुमान जी (Hanuman Ji) बहुत दयालू और भक्‍तों की हर पीड़ा हरने वाले है, लेकिन फिर भी उनकी पूजा करने के कुछ नियम हैं।

 Hanuman Jayanti: Hanuman Chhudavai in the crisis, mind-boggling meditation which brings

वायु पुराण में एक श्लोक वर्णित है- आश्विनस्या सितेपक्षे स्वात्यां भौमे च मारुतिः। मेष लग्ने जनागर्भात स्वयं जातो हरः शिवः।। यानी- भगवान हनुमान का जन्म कृष्ण पक्ष चतुर्दशी मंगलवार को स्वाति नक्षत्र की मेष लग्न और तुला राशि में हुआ था। हनुमान जी बाल्यकाल से ही तरह-तरह की लीलाएं करते थे। एक दिन उन्हें ज्यादा भूख लगी तो सूर्य को मधुर समझकर उसे अपने मुंह में भर लिया। जिसके कारण पूरे संसार में अंधेरा छा गया। इसे विपत्ति समझकर इंद्र भगवान ने हनुमान जी पर व्रज से प्रहार किया। इसके प्रभाव से उनकी ठोड़ी टेढ़ी हो गई। यही वजह है कि इनका नाम हनुमान पड़ा।

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