उत्तर प्रदेशवाराणसी

देवी की नौवीं स्वरुप माँ सिद्धिदात्री के दर्शन से होती है अष्ट सिद्धियों की प्राप्ति

वाराणसी। वासंतिक नवरात्र के अंतिम और नवमी तिथि को माँ सिद्धदात्री देवी के दर्शन -पूजन के की मान्यता है। सुबह से ही माँ के दर्शन के भक्तो की लंबी कतारे लगी हुई है भक्त माता के दर्शन के लिए पुरे श्रद्धा भाव के साथ कतारबद्ध होकर अपनी पारी का इन्तजार कर रहे। आम दिनों में माँ सिद्धदात्री के दर्शन हेतु मंगलवार का दिन सुनिचित है लेकिन नवरात्र की नवमी तिथि को मंदिर में भक्तो की विशेष भीड़ होती है।  माँ सिद्धदात्री को गुड़हल का फूल सबसे प्रिय है। मान्यताओं के अनुसार जो पुरे नवरात्र देवी के दर्शन नहीं कर पाते उन्हें अंतिम दिन सिद्धदात्री के दर्शन से नौ दिन के दर्शन का फल मिलता है। माँ सिद्धदात्री का मंदिर मैदागिन क्षेत्र के गोलघर इलाके के सिद्धदात्री गली में स्थित है। माँ सिद्धदात्री के नाम पर ही गली का नाम रखा गया है।

Goddess Siddhidatri's ninth form gives Ashta Siddhis in varanasi

मां दुर्गा की नौवीं शक्ति के स्वरूप में माँ सिद्धिदात्री है। ये सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली हैं। मार्कण्डेय पुराण के अनुसार अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वाशित्व-ये आठ सिद्धियां होती हैं। देवी पुराण के अनुसार भगवान शिव ने सिद्धिदात्री की कृपा से ही इन सिद्धियों को प्राप्त किया था। उनकी अनुकंपा से ही भगवान शिव का आधा शरीर देवी का हुआ था। इसी कारण वह लोक में ‘अर्धनारीश्वर’ नाम से प्रसिद्ध हुए।

Goddess Siddhidatri's ninth form gives Ashta Siddhis in varanasi

मां सिद्धिदात्री चार भुजाओं वाली हैं। इनका वाहन सिंह है। ये कमल पुष्प पर आसीन होती हैं। इनके दाहिनी तरफ के नीचे वाले हाथ में चक्र, ऊपर के हाथ में गदा तथा बायीं तरफ के नीचे वाले हाथ में शंख और ऊपर वाले हाथ में कमल पुष्प है। नवरात्र पूजन के नौवें दिन इनकी उपासना की जाती है। इस दिन शास्त्रीय विधि- विधान और पूर्ण निष्ठा के साथ साधना करने वाले साधक को सभी सिद्धियों की प्राप्ति हो जाती है।

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