उत्तर प्रदेशवाराणसी

गंगा बनी यमुना, कालियानाग के फन पर बंशी बजाये कन्हैया

वाराणसी। शिव की नगरी काशी में कल कल छल छल करती गंगा एक दिन के लिए यमुना बन जाती है और मौका होता है। भगवान कृष्ण की प्रसिद्द लीला नाग नथैया का। इस दिन तुलसी घाट पर वर्षो से चली आ रही है देर शाम होने वाले इस पाँच मिनट के लीला में लाखो की संख्या में श्रद्धालु भाग लेते है इस आयोजन में विदेशी सैलानी भी भारी संख्या में देखे जाते है  इस लीला में भगवान श्रीकृष्ण अपने सखा का गेंद को वापस लेन के लिए कदम के पेड़ से यमुना रूपी गंगा में छलांग लगाते है।

अभी कलयुग का कलिकाल चल रहा है लेकिन हम अब बात कर रहे है उस युग का जब नटवर नागर ने जन्म लिया और अपने लीला के माध्यम से समाज को एक सार्थक सन्देश देने का काम किया द्वापर युग में एसा ही एक सन्देश भगवान श्री कृष्ण ने अपने सखा के साथ गेंद खेलते हुए यमुना तट पर दिया था । जल प्रदुषण को शुद्ध करने के लिए किये उनके लीला कालिया दमन आज और भी ज्यादा सामायिक नजर आती है जब अपने नदी नालो के साथ इमानदार नहीं है।

 

यूँ तो शिव की नगरी काशी में उतर वाहिनी गंगा बहती है लेकिन शिव की जटाओ की शोभा बढाने वाली गंगा साल में एक दिन यमुना का रूप धारण कर लेती है और इस स्वरूप को देखने के लिए गोस्वामी तुलसी दास के निवास स्थान तुलसी घाट पर लाखो की सख्या में नर नारी पहुचते हैं आयोजन कई दिन पहले से शुरू हो जाया करता है लेकिन शाम के ठीक 4,40 पर हर हर महादेव के गगन भेदी उदघोष के साथ श्री कृष्ण कदम के पेड़ पर चढ़ कर गंगा रूपी जमुना में कूदते है और कालिया नाग के दमन के बाद दर्शन देने के साथ ही लीला का समाप्ति होता  है ।

श्रद्धालुओ से पटा ये घाट आज कृष्ण लीला से जुड़े कालिया दमन लीला को देखने यहाँ जुटी है , बात द्वापर युग की है जब श्री कृष्ण अपने बाल सखाओ के साथ यमुना तट पर गेंद खेल रहे थे। की अचानक गेंद यमुना के गहरे पानी में जा पहुंची। सखा भी अपने गेंद के लिए जिद्द करना शुरू कर दिया लिहाजा कृष्ण यमुना के छलाग लगा दी। जब इस बात की सुचना नगर वाशियो को हुआ तो भय से परेशा होकर वो नदी तट  पर पहुचने लगे जिसका  वजह यह रहा की यमुना नदी में कालिया नामक विषैला नाग रहा करता था, जिसके जहर से नदी का पानी भी विषैला हो गया था।.नर नारी भय के आशंका से नदी तट पर अनहोनी का इंतज़ार करने लगे की तभी कृष्ण कालिया नाग के विशाल फन पर नृत्य करते हुए पानी के सतह पर आ गए और कालियादहन कहलाये।

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