उत्तर प्रदेशवाराणसी

पटाखों ने बिगाड़ी बनारस की आबोहवा, कोविड का खतरा बढ़ने के आसार

  • दिवाली पर क्लाइमेट एजेंडा की रिपोर्ट हुई जारी
  • शहर के 18 जगहों पर की गयी निगरानी
  • पटाखों के साथ खराब कचरा प्रबंधन व खस्ताहाल सड़के जिम्मेदार

Firecrackers weakened Banaras, chances of covid increasing

वाराणसी। इस वर्ष भी दिवाली पर वाराणसी में वायु प्रदूषण की रिपोर्ट जारी की गई। इस रिपोर्ट के अनुसार, कोविड-19 संक्रमण के खतरे के मद्देनजर बनारस में वायु गुणवत्ता ठीक रखने के उद्देश्य से जारी NGT के दिशा-निर्देशों की खुलकर अवहेलना हुई और जिला प्रशासन हर वर्ष की तरह इस बार भी मूक-दर्शक बना रहा। पूर्ण रूप से पटाखा प्रतिबन्ध के लिए जारी आदेश को ताक पर रखते हुए काशीवासियों ने जहां एक तरफ जमकर पटाखे बजाये, वहीं दूसरी ओर इन पटाखों से शहर में पीएम 2.5 और पीएम 10 का स्तर भारत सरकार के मानकों की तुलना में क्रमशः चार और साढ़े चार गुना अधिक रहा। आंकड़ों से यह साफ़ जाहिर है कि न केवल बच्चे, बूढ़े बल्कि कोविड के मरीजों की सुरक्षा को भी ताक पर रखा गया और जिला प्रशासन मूक दर्शक बना रहा।

मुख्य अभियानकर्ता एकता शेखर ने बताया कि “शहर में शहर में पीएम 10 मुख्य प्रदूषक तत्व रहा। आशापुर सबसे अधिक प्रदूषित रहा जहां पी एम 10 और पीएम 2.5 की मात्रा भारत सरकार के मानकों की तुलना में क्रमशः चार और साढ़े चार गुना अधिक पाया गया, जबकि दूसरे स्थान पर पांडेयपुर क्षेत्र रहा जहां उपरोक्त प्रदूषक कण क्रमशः चार और साढ़े तीन गुना रहा। शीर्ष पांच प्रदूषित क्षेत्रों में आशापुर, पांडेयपुर के अलावा सारनाथ, काशी स्टेशन और कचहरी पाया गया, जबकि तुलनात्मक तौर पर रविन्द्रपुरी क्षेत्र थोड़ा साफ़ रहा जहां पी एम 2.5 और पी एम 10 मानक से दो गुना अधिक पाया गया। संस्था के हवाले से जारी रिपोर्ट में पी एम 10 के चिंताजनक आंकड़े बताते हैं कि पटाखों के साथ-साथ शहर की खस्ताहाल सड़कें और बेहद खराब कचरा प्रबंधन भी जिम्मेदार है। हालांकि, शहर में तीन नए वायु गुणवत्ता मापन यंत्रों की स्थापना सम्बन्धी पिछले सप्ताह जारी आदेश एक अच्छी पहल है, जिसे काफी पहले ही लिया जाना चाहिए था।

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