उत्तर प्रदेशवाराणसी

चाइनीज गणेश लक्ष्मी हुए फेल, हाथों की बनी मूर्तियों की है डिमांड

वाराणसी। दीवाली मनाए जाने वाले अपने घरो में शुभ मुहूर्त में लक्ष्मी गणेश पूजन का शास्त्रीय विधान है। धर्म ग्रंथों की मानें तो ऐसा करने मात्र से वर्ष भर विध्न विग्नेश्वर भगवान विनायक समस्त परेशानियों से दूर रखते है। वहीं माता लक्ष्मी घर में धन सम्प्रदा के साथ आरोग्य प्रदान करती है। आम तौर पर ये मुर्ति स्थानीय स्तर पर कुम्हार या प्रजापति परिवार द्वारा हाथ से बनाये हुए होते है। जिसे शास्त्रीय मान्यतायों में भी शुद्ध माना जाता रहा है। लेकिन पिछले कुछ सालों में हर जगह अपनी उपस्थिति दर्ज कराने वाला चाइना हमारे देवी देवताओ को भी पहचानने लगा है। और अपनी परिधि को बढाते हुए वो देव प्रतिमाओं को भी बनाने लगा है जो आज के ग्राहकों की पहली पसंद बनी हुई थी।


बदलते दौर में इस दीपावली पर स्वदेशी मिटृटी के बने गणेश लक्ष्मी की पूजा का डिमांड बढ़ा है। और मार्केट में उपलब्ध चाइनीज लक्ष्मी गणेश की डिमांड बेहद कम देखी जा रही है। बिक्री में आये उछाल की वजह से कुम्हार भी काफी उत्साहित है। अलग बात है कि कोरोना का टिस भी सामने आ रहा है। पिछले दो सालों से आये इस रुझान से इन मूर्तियों से अपने घर को चलाने वाले जहाँ खुश है वही कुम्हारों की हाथो की कला छाया संकट की छटने लगा है।

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