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जन्मदिन विशेष : “डालडा” नाम से लेकर अभिनेत्री “माला सिन्हा” बनने तक का सफर

मुंबई। 11 नवंबर, 1936 को जन्मी माला सिन्हा के पिता बंगाली और मां नेपाली थी। उनके बचपन का नाम “आल्डा” था। स्कूल में बच्चे उन्हें “डालडा” कहकर चिढ़ाते थे जिसकी वजह से उनकी मां ने उनका नाम बदलकर “माला” रख दिया।

Birthday special: Journey from the name "Dalda" to becoming actress "Mala Sinha"

1957 में, बॉलीवुड अभिनेता और निर्देशक गुरुदत्त ने अपनी फिल्म प्यासा (1957) में माला सिन्हा को लिया। इसके लिये पहले वह मधुबाला को लेना चाहते थे। प्यासा के बाद, उनकी प्रमुख सफलताओं में फिर सुबह होगी (1958) और यश चोपड़ा के निर्देशन में बनी पहली फ़िल्म धूल का फूल, (1959) थी जिसने उन्हें एक लोकप्रिय सितारे में बदल दिया। वह 1958 से शुरुआती 60 के दशक में परवरिश (1958), उजाला, मैं नशे में हूँ, दुनिया ना माने, लव मैरिज (1959), बेवक़ूफ़ (1960), माया (1961), हरियाली और रास्ता, दिल तेरा दीवाना (1962), अनपढ़ और बम्बई का चोर (1962) और जैसी कई सफल फिल्मों का हिस्सा रहीं[3]।

अपनी सफल 1960 और 1970 के दशक की भूमिकाओं में, उन्हें राज कपूर, देव आनंद, किशोर कुमार और प्रदीप कुमार जैसे बड़ी उम्र के कलाकार और 1950 के दशक के उत्तरार्ध से उभरते हुए सितारे जैसे शम्मी कपूर, राजेन्द्र कुमार और राज कुमार के साथ लिया गया। उन्होंने अपने दौर के कई नए कलाकारों के साथ काम किया जिनमें मनोज कुमार, धर्मेन्द्र, राजेश खन्ना, सुनील दत्त, संजय ख़ान, जीतेन्द्र और अमिताभ बच्चन शामिल हैं।

Birthday special: Journey from the name "Dalda" to becoming actress "Mala Sinha"

1966 में एक्ट्रेस माला सिन्हा ने एक नेपाली एक्टर चिदाम्बर प्रसाद लोहानी से शादी रचा ली थी. दोनों की एक बेटी हुई प्रतिभा सिन्हा, जिन्होंने ने भी फिल्मी दुनिया में जोर-शोर से कदम रखा. हालांकि प्रतिभा का करियर ज्यादा दिन नहीं चला।

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