उत्तर प्रदेशवाराणसी

विश्व प्रसिद्ध काशी के भरत मिलाप की नहीं टूटी परंपरा, सांकेतिक तरीके से किया गया लीला मंचन

वाराणसी। कहते हैं आज के दिन नाटी इमली की इस भरत मिलाप में भगवान श्रीराम स्वयं अपने भाइयों से मिलने आते हैं। हर वर्ष होने वाले इस आयोजन में असंख्य श्रद्धालु पुण्य की भागीदारी होते थे। पर इस बार कोरोना महामारी के संकट को देखते हुए लीला की परंपरा का निर्वाह किया गया। हर वर्ष की भांति इस भरत मिलाप में काशी नरेश अनंत नारायण सिंह पहुंचे। भगवान की सुंदर झांकियों को देख नतमस्तक हो आशीर्वाद लिए फिर लीला की शुरुआत हुई।

Bharat Milan of world famous Kashi not broken tradition, staged Leela in symbolic manner

सरकार की गाइडलाइनओं के साथ विश्व प्रसिद्ध भरत मिलाप में भगवान श्रीराम और लक्ष्मण ने भरत और शत्रुघ्न से 14 साल के वनवास के बाद देखते ही लिपट पड़े, बड़ा ही मनमोहक दृश्य था, हर ओर भगवान की जयकारें गुजने लगे। कहां जाता है कि इस मिलाप की झांकी में भगवान राम स्वयं और उनके चारों भाई यहां आते हैं। इनके रूपों को देखने वाले लोगों के दिलों की धड़कन ही रुक जाती है। चारों भाइयों का प्यार और आदर सम्मान पूरे विश्व में प्रचलित है। खास तौर पर पूरे बनारस में इस दिन का लोगों को बेहद इंतजार होता है। ताकि वह अपने भगवान प्रभु श्री राम का दर्शन करअपनी हर अभिलाषाओं को पूर्ण करें। यही वजह है कि इस पूरे लीला में असंख्य श्रद्धालु पहुंचते हैं हर और लोगों की भीड़ और जयकारे से पूरा आयोजन गूंजता रहता है।

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