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सुख-समृद्धि, आरोग्य व मनोवांछित फल प्राप्ति के लिए छठ महापर्व की परम्परा : गरिमा

 Bettiah in bihar

बेतिया। नप सभापति गरिमा देवी सिकारिया द्वारा छठव्रति महिला-पुरुषों के बीच वस्त्र, उपयोगी फल, दउरा, सुपली आदि का वितरण किया गया। सोमवार को सभापति के आवासीय कार्यालय पर आयोजित कार्यक्रम के मौके पर जुटे व्रतियों के बीच छठ महापर्व की महत्ता व पौराणिक महत्व की विस्तार से चर्चा की गई।

सभापति ने कहा कि लोकआस्था का महापर्व सुख-समृद्धि तथा मनोवांछित फल प्राप्ति के लिए यह पर्व मनाया जाता है। इस पर्व को स्त्री और पुरुष समान रूप से मनाते हैं। छठ पूजा की परंपरा और उसके महत्व का प्रतिपादन करने वाली अनेक पौराणिक और लोक कथाएं प्रचलित हैं। सभापति ने कहा कि रामायण पर आधारित एक मान्यता के अनुसार लंका विजय के बाद रामराज्य की स्थापना के दिन कार्तिक शुक्ल षष्ठी को भगवान राम और माता सीता ने उपवास किया और सूर्यदेव की आराधना की।

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सप्तमी को सूर्योदय के समय फिर से अनुष्ठान कर सूर्यदेव से आशीर्वाद प्राप्त कर राम राज्य का सुआरम्भ किया था। छठ पर्व के बारे में एक कथा और भी है। कथा के अनुसार जब पांडव अपना सारा राजपाट जुए में हार गए, तब द्रौपदी ने छठ व्रत रखा। तब उसकी मनोकामनाएं पूरी हुईं तथा पांडवों को राजपाट वापस मिल गया। सभापति श्रीमती सिकारिया ने बताया कि इसको लेकर प्रचलित लोक परंपरा के अनुसार सूर्य देव और छठी मईया का संबंध भाई-बहन का है। लोक मातृका षष्ठी की पहली पूजा सूर्य ने ही की थी। उसी को स्मरण करते हुए यह महापर्व आदि काल से मनाया जाता रहा है।

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